preloader
नेपियर उत्पादन परियोजना

नेपियर उत्पादन

हर मौसम में हरा चारा मिलना कठिन हो जाता है, इसलिए उमा कल्याण ट्रस्ट ने वर्ष भर हरे चारे के रूप में प्राप्त होने वाले नेपियर घास के उत्पादन की योजना बनाई है। इससे आने वाले समय में गोवंश के लिए चारे की समस्या का काफी हद तक समाधान मिल सकेगा।

पहले चरण में मथुरा जनपद के अलग-अलग ब्लॉक और ग्राम पंचायतों में लगभग 1000 एकड़ भूमि पर नेपियर घास के उत्पादन की महत्वाकांक्षी योजना पर काम चल रहा है।

ट्रस्ट द्वारा मथुरा प्रशासन के सहयोग से गांवों में ग्राम पंचायत की खाली पड़ी गोचर भूमि का उपयोग नेपियर घास के उत्पादन के लिए किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त किसानों से भी नेपियर उत्पादन के लिए लीज/पट्टे पर भूमि ली गई है।

नेपियर उत्पादन योजना

भूमि शोधन और पानी की उपलब्धता के लिए ट्यूबवेल आदि की व्यवस्था के बाद अभी तक नगला डीकड़ी, बढ़ौता अझई, धमसिंगा, शेरगढ़, बलदेव आदि गांवों में लगभग 100 एकड़ भूमि पर नेपियर लगाई जा चुकी है।

इन सभी स्थानों पर उमा कल्याण ट्रस्ट द्वारा जैविक विधि से नेपियर की खेती की जा रही है। स्थानीय प्रशासन की ओर से भी इस योजना में पूरा सहयोग मिल रहा है।

  • 1000 एकड़: प्रथम चरण में लगभग 1000 एकड़ भूमि पर उत्पादन की योजना।

  • 100 एकड़: विभिन्न गांवों में लगभग 100 एकड़ भूमि पर नेपियर लगाई जा चुकी है।

  • जैविक खेती: नेपियर का उत्पादन जैविक विधि से किया जा रहा है।

  • गोचर भूमि: ग्राम पंचायत की खाली पड़ी गोचर भूमि का उपयोग।

  • किसानों की भागीदारी: किसानों से लीज/पट्टे पर भूमि लेकर उत्पादन किया जा रहा है।

  • प्रशासनिक सहयोग: नेपियर उत्पादन में स्थानीय प्रशासन का सहयोग प्राप्त हो रहा है।

नेपियर घास की विशेषताएँ

नेपियर घास मुलायम, पाचनशील और पौष्टिक होती है, जिससे यह दुर्बल गोवंश के लिए भी उपयोगी चारा है। प्रोटीन और विटामिन से भरपूर होने के कारण यह गोवंश के पोषण के लिए उत्तम खाद्य पदार्थ है।

इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यदि इसे खेत में एक बार लगा दिया जाए तो यह अगले 8 से 9 वर्षों तक हरे चारे के रूप में वर्ष भर प्राप्त होती रह सकती है।

पहली और दूसरी कटाई में उपज कम मिलती है, परंतु तीसरी कटाई से अच्छी उपज मिलने लगती है। अनुमानतः एक वर्ष में प्रति एकड़ 150 से 200 टन तक हरा चारा प्राप्त हो सकता है। इसे 300 से 400 टन प्रति एकड़ तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

  • मुलायम और आसानी से पचने वाला हरा चारा।

  • प्रोटीन और विटामिन से भरपूर।

  • दुर्बल गोवंश के लिए भी उपयोगी।

  • एक बार लगाने पर कई वर्षों तक उत्पादन।

  • वर्ष भर हरे चारे की उपलब्धता में सहायक।

  • गोवंश द्वारा रुचि से खाया जाने वाला पौष्टिक चारा।

वर्ष भर हरे चारे की उपलब्धता

गोपालकों को गर्मी के दिनों में हरे चारे की कमी होने लगती है। किसान भाई नेपियर की खेती करके हरे चारे की इस कमी को काफी हद तक दूर कर सकते हैं।

नेपियर की फसल तेजी से बढ़ने वाली होती है और कम समय में पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध कराती है। इसकी जूसी प्रकृति के कारण गोवंश इसे चाव से खाते हैं।

यदि किसान अपने खेत के एक हिस्से में नेपियर घास लगा लें तो सालभर चारे की चिंता काफी हद तक कम हो सकती है। इससे गोवंश स्वस्थ रखने में सहायता मिलती है और दुग्ध उत्पादन में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

गोवंश को नेपियर खिलाने की विधि

नेपियर की कटाई कर इसे भूसे में मिलाकर गोवंश को खिलाया जाता है। सामान्यतः चार किलो भूसे में दो किलो नेपियर घास मिलाने से अच्छा परिणाम प्राप्त किया जा सकता है।

नेपियर घास को दलहनी चारे के साथ मिलाकर गोवंश को खिलाना और भी उपयोगी हो सकता है। संतुलित मात्रा में हरा एवं सूखा चारा देने से गोवंश के आहार में विविधता और पोषण बनाए रखने में सहायता मिलती है।

  • 4 किलो भूसा + 2 किलो नेपियर: सामान्य मिश्रण के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

  • दलहनी चारे के साथ मिलाकर खिलाना उपयोगी।

  • हरे और सूखे चारे का संतुलित मिश्रण।

  • नियमित उपलब्धता से चारे की समस्या कम करने में सहायता।

गोपालक किसानों के लिए लाभ

नेपियर की खेती गोपालक किसानों के लिए हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने का एक प्रभावी विकल्प हो सकती है। किसान अपने खेत के एक हिस्से में नेपियर लगाकर लंबे समय तक हरा चारा प्राप्त कर सकते हैं।

पर्याप्त और पौष्टिक हरा चारा मिलने से गोवंश के स्वस्थ रहने में सहायता मिलती है। साथ ही, बेहतर पोषण के कारण दुग्ध उत्पादन में वृद्धि की संभावना रहती है, जिससे किसानों की आय में भी सुधार हो सकता है।

  • हरे चारे की कमी को दूर करने में सहायक।

  • गोवंश के पोषण और स्वास्थ्य में सहायता।

  • दूध उत्पादन में सुधार की संभावना।

  • किसानों के लिए वर्ष भर चारे की उपलब्धता।

  • तेजी से बढ़ने वाली फसल से पर्याप्त हरा चारा।

  • किसानों की आय बढ़ाने में संभावित योगदान।

गोशालाओं एवं गोपालकों तक चारे की उपलब्धता

उमा कल्याण ट्रस्ट का उद्देश्य है कि कोई भी गोवंश भूखा न रहे। इसी उद्देश्य से नेपियर उत्पादन से प्राप्त हरे चारे को राल गोशाला के साथ-साथ गोपालक किसानों और छोटी गोशालाओं को भी उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।

इसके माध्यम से गोपालक किसानों और छोटी गोशालाओं को लागत मूल्य पर नेपियर चारा उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे अधिक से अधिक गोवंश को पर्याप्त और पौष्टिक हरा चारा मिल सके।

दूध उत्पादन में सहायक

दूध उत्पादन बढ़ाने में भी नेपियर घास महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। गाय को संतुलित आहार के साथ नेपियर घास देने से अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

नियमित रूप से नेपियर खिलाने से गोवंश के पोषण और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिलती है। यह चारा आसानी से पचने वाला होता है और पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने में सहायक है।

विशेषज्ञों के अनुसार नेपियर चारे की खेती करके गोपालक न केवल चारे की कमी को दूर कर सकते हैं, बल्कि बेहतर पोषण के माध्यम से दूध उत्पादन बढ़ाकर अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

उमा कल्याण ट्रस्ट का उद्देश्य

नेपियर उत्पादन परियोजना का उद्देश्य केवल राल गोशाला के लिए हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि मथुरा जनपद के गोपालक किसानों और छोटी गोशालाओं तक भी पौष्टिक हरा चारा पहुंचाना है।

वर्ष भर हरे चारे की उपलब्धता के माध्यम से गोवंश को पर्याप्त, पौष्टिक और संतुलित आहार मिल सके तथा कोई भी गोवंश चारे के अभाव में भूखा न रहे—इसी दिशा में उमा कल्याण ट्रस्ट निरंतर प्रयासरत है।

नेपियर घास वर्षभर पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध कराकर गोवंश के पोषण और स्वास्थ्य में सहायक है। इसकी खेती से चारे की कमी दूर करने के साथ दूध उत्पादन बढ़ाकर गोपालकों की आय में भी वृद्धि की जा सकती है।

Read More...

नेपियर उत्पादन योजना से जुड़ें और गोवंश के लिए हरे चारे की उपलब्धता में अपना योगदान दें 🌱🐄

shape
shape

अपने मित्रों एवं परिवार के साथ साझा करें