ब्रह्मऋषि श्री देवरहा बाबा गौ आश्रय स्थल, राल (मथुरा)
‘ब्रह्मऋषि श्री देवरहा बाबा गौ आश्रय स्थल’ उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में गोवर्धन मार्ग पर स्थित है। वर्तमान में राल ग्राम पंचायत की इस गोशाला का संचालन ‘उमा कल्याण ट्रस्ट’ की गौ धाम, वृंदावन की टीम द्वारा किया जा रहा है।
सड़क पर भटकने को मजबूर निराश्रित गोवंश को आश्रय देने के लिए ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र जी ने पहल की। तत्पश्चात वर्ष 2019 में मथुरा ज़िला प्रशासन ने ब्रज तीर्थ विकास परिषद के प्रस्ताव पर 136 एकड़ क्षेत्र में गोशाला बनाने के लिए योजना तैयार की।
योजना में इसे उत्तर प्रदेश की मॉडल गोशाला के रूप में विकसित किया जाना शामिल था, जो गोवंश को आश्रय देने के साथ-साथ गोबर एवं गोमूत्र सहित पंचगव्य का उपयोग करके वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बन सके।
वर्ष 2019 में राल ग्राम पंचायत की यह गोशाला अस्तित्व में आई। प्रारंभ से लेकर अगस्त 2025 तक राल गोशाला का संचालन दिल्ली की श्रीकृष्ण गोशाला के माध्यम से किया जा रहा था।
31 अगस्त 2025 को गौ सेवा के लिए कार्य कर रहे ‘उमा कल्याण ट्रस्ट’ ने राल गोशाला का दायित्व सम्भाला। दायित्व संभालने के साथ ही अनेक चुनौतियाँ सामने थीं, जिसमें सबसे बड़ी चुनौती गोवंश के रख-रखाव, स्वास्थ्य और चारे की थी।
बाड़ा प्रबंधन
गोशाला में गोवंश सहज रूप से रह सके और स्वच्छंद रूप से विचरण कर सके, इसके लिए बाड़ों को सुव्यवस्थित किया गया और क्षमता से अधिक गोवंश को दूसरे बाड़ों में स्थानांतरित किया गया।
बाड़ों में जो मिश्रित गोवंश था, उन्हें अलग किया गया। इस प्रकार कमज़ोर, वृद्ध और बीमार गोवंश; बच्चे, दूधवाली और गर्भवती गायों के लिए अलग-अलग बाड़े निर्धारित किए गए।
बाहर से आने वाले नवागत गोवंश को एक महीने तक दूसरे गोवंश से अलग बाड़े में क्वारंटाइन किया जाता है, जिससे ये गोवंश गोशाला के वातावरण में सहज हो सकें।
सम्पूर्ण गोशाला को चार ब्लॉक्स में बांटा गया है।
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01. सुरभि ब्लॉक
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02. कपिला गौ वत्स ब्लॉक
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03. नंदिनी ब्लॉक
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04. नंदी ब्लॉक
सुरभि ब्लॉक
सुरभि ब्लॉक में सात बाड़े हैं, जहाँ दूध वाली गाय, तंदुरुस्त और गर्भवती गाय रखी जा रही हैं। यहाँ दो हज़ार से अधिक गोवंश को रखने की व्यवस्था है।
कपिला गौ वत्स ब्लॉक
कपिला गौ वत्स ब्लॉक में बछड़े, बछिया और एक अलग बाड़े में गिर और साहिवाल गाय को रखा गया है।
यहाँ गोवंश के लिए खुले बाड़े का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है।
नंदिनी ब्लॉक
नंदिनी ब्लॉक में गोवंश के लिए व्यवस्थित आवास और देखभाल की सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है, जिससे गोवंश को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध हो सके।
नंदी ब्लॉक
चौथा नंदी ब्लॉक है। यहाँ लगभग दो हज़ार नंदियों को रखने की क्षमता है। इनमें से 80 साहिवाल नस्ल के नंदी हैं।
इसमें से तंदुरुस्त नंदियों को गौ संवर्धन के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके लिए उन्हें अलग-अलग बाड़ों में छोड़ा जाता है।
शेड और ओपन बाड़े
गोशाला में शेड के अलावा ओपन बाड़े की व्यवस्था है, जिससे गोवंश सर्दी में धूप के लिए दिन के समय और गर्मी के मौसम में खुली हवा के लिए रात भर ओपन बाड़े में रह सकें।
चौबीस घंटे साफ पानी के लिए हर ब्लॉक में पाँच हज़ार लीटर के वाटर टैंक लगाए गए हैं।
गोवंश को सर्दी से बचाने के लिए सभी बाड़ों में तिरपाल लगाया गया है और बाड़ों में ऊपर जहाँ खुला स्थान था उसे टीन शीट से कवर किया गया है।
शेड और ओपन दोनों बाड़ों में गोवंश के लिए सानी तैयार की जाती है।
बाड़ों में चौबीस घंटे गोवंश की निगरानी को सुनिश्चित करने के लिए रात्रिकालीन पाली शुरू की गई है।
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हर ब्लॉक में रात्रि पाली के दौरान कम से कम पाँच लोगों की टीम रहती है।
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एक सुपरवाइज़र की उपलब्धता।
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दो ग्वालों की उपलब्धता।
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एक एलएसए की उपलब्धता।
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एक ट्रैक्टर चालक की उपलब्धता।
चारा व्यवस्था
गोवंश को पर्याप्त मात्रा में हरा- सूखा चारा और पौष्टिक आहार — चूनी, चोकर, दलिया, गुड़ आदि — नियमित रूप से मिलता रहे, ऐसी व्यवस्था की गई है।
हरा चारा
गोवंश के लिए किसान से मिलने वाला हरा चारा और मौसम के हिसाब से गन्ना, मटर के छिलके, सब्ज़ियाँ आदि की ख़रीददारी की जाती है।
सूखा चारा
राल गोशाला परिसर में अभी दो बड़े भूसाघर हैं, जहाँ कम से कम पंद्रह सौ टन भूसा रखा जाता है।
एक और नए भूसाघर का निर्माण शुरू हो गया है, जहाँ गेहूँ की कटाई के बाद भूसा स्टोर किया जाएगा। इस नए भूसाघर में 12 सौ टन से अधिक भूसा स्टोर किया जा सकेगा।
10 हज़ार टन भूसा स्टोर करने की योजना पर काम चल रहा है।
अधिकतर भूसा पंजाब से आ रहा है। पंजाब में भूसे की कटाई अप्रैल से शुरू होती है। उस समय वहाँ 2–3 जगह 15 से 20 हज़ार टन भूसा स्टोर करने की योजना है, जिससे राल गोशाला को साल भर भूसा मिलता रहे।
इस योजना से मथुरा की आर्थिक दृष्टि से कमज़ोर गोशालाओं और किसानों को लागत मूल्य पर भूसा दिया जाएगा, जिससे गोवंश को पर्याप्त मात्रा में चारा मिल सकेगा।
टीएमआर के माध्यम से चारे को अच्छी तरह मिक्स कर गोवंश को दिया जाता है।
गोवंश के लिए आने वाले दाना, चूनी-चोकर की लैब टेस्टिंग होती है और रिपोर्ट्स के अनुसार ही उन्हें चूनी-चोकर या कैटल फीड दिया जाता है।
गोवंश को न्यूट्रीशियस कैटल फीड मिले, इसके लिए आवश्यक सामग्री मंगवाकर उसे मिक्स किया जाता है। इसके लिए वृंदावन की हासानंद गोशाला का सहयोग लिया गया है।
हर गोवंश को 8 से 10 किलो हरा चारा, 3 से 4 किलो भूसा और 1 से 2 किलो दाना उपलब्ध हो सके, इसके लिए गोदामों में पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य – चिकित्सा
गोवंश के स्वास्थ्य की निरंतर देखभाल और उपचार के लिए पशु चिकित्सक और एलएसए की सेवाएं ली जा रही हैं। बीमार गोवंश के लिए अलग से अस्पताल बाड़ा है।
आवश्यक औषधियों की निरंतर उपलब्धता रहे, इसका विशेष ध्यान रखा जाता है।
गोवंश के स्वास्थ्य के लिए 50 लीटर के दो सौ कैन कैल्शियम के और लीवर टॉनिक के सौ कैन ख़रीदे गए हैं। ये विशेष रूप से उमा कल्याण ट्रस्ट के लिए बनवाये गए हैं।
सरकार द्वारा समय-समय पर वैक्सीनेशन और टैगिंग की भी समुचित व्यवस्था की जा रही है।
उपकरणों का रख-रखाव
गोवंश में उपयोग आने वाले उपकरणों, वाहन, ट्रैक्टर, ट्रॉली आदि की मरम्मत और उनके रख-रखाव का ध्यान रखा जाता है।
सिविल वर्क
गोवंश के बाड़ों आदि निर्माण कार्य के लिए एक अलग से टीम रखी गई है, जो गोशाला के बुनियादी ढांचों के रख-रखाव का कार्य करती है।
बिजली - पानी
बिजली और पानी के लिए विशेषज्ञों की टीम का सर्वे हुआ है।
यहाँ ट्रांसफॉर्मर 75 किलोवाट क्षमता का है। गोशाला में विस्तार के कारण इसका लोड बढ़वाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
गोशाला में प्रॉपर केबलिंग करने, वोल्टेज लॉस को कम करने, सोलर लाइट की व्यवस्था करने और सभी बाड़ों में बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए काम हो रहा है।
आरओ (RO) वाटर प्लांट
राल गोशाला में पानी का टीडीएस 2000 से 2500, और इससे भी अधिक है, जो गोवंश के लिए हानिकारक माना जाता है।
इसके अलावा गोबर, गोमूत्र और अन्य खराब पदार्थ भी पानी को दूषित करते हैं। इसे सुधारने के लिए उमा कल्याण ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी और गौ धाम वृंदावन के संस्थापक श्री नारायण अग्रवाल जी ने विशेषज्ञों की सलाह ली है।
पानी की जाँच करवाकर आरओ वाटर को गौ माता के लिए उपयोग किया जा सके, इसकी व्यवस्था की गई है। इसके लिए 20,000 लीटर प्रति घंटा की क्षमता का आरओ प्लांट लगाया गया है।
परिसर में रहने वालों के लिए पानी स्टोरेज़ की व्यवस्था के साथ ही 100 लीटर प्रति घंटा की क्षमता वाला आरओ प्लांट लगवाया गया है।
अन्नपूर्णा भोजनालय
गोशाला में अन्नपूर्णा भोजनालय की व्यवस्था है, जहाँ प्रतिदिन लगभग ढाई-तीन सौ लोगों के लिए भोजन प्रसाद तैयार किया जाता है।
यहाँ की रसोई में मिट्टी के चूल्हों का प्रबंध है, जहाँ पारम्परिक रूप से भोजन बनाया और परोसा जाता है।
31 अगस्त 2025 को गोशाला का दायित्व संभालने के बाद अन्नपूर्णा का सुनियोजित ढंग से नवीनीकरण किया गया है।
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भोजनालय की फर्श को पक्का किया गया।
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बिजली सप्लाई के तारों को सुव्यवस्थित किया गया।
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एग्ज़ॉस्ट फैन लगाये गये।
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चारों तरफ के खुले स्थान को बंद किया गया।
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पर्याप्त स्टोरेज़ और सफ़ाई की व्यवस्था की गई।
गौ उत्पाद केंद्र
गोशाला परिसर में गौ उत्पाद बनाने के लिए एक नया विभाग प्रारंभ किया गया है, इसके लिए गौ उत्पाद कारखाने का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
पंचगव्य चिकित्सा
गोशाला परिसर में पंचगव्य उत्पाद बनाने और पंचगव्य चिकित्सा की व्यवस्था भी की जा रही है।
गोबर गैस प्लांट
गोबर गैस प्लांट को ठीक कराया गया, जिससे अब अन्नपूर्णा में बायोगैस का उपयोग हो रहा है। अभी प्रतिदिन 500 किलो गोबर से 25 m³ गैस मिल रही है।
शुद्ध बिनौला देशी घी
देशी गाय का शुद्ध देशी घी उपलब्ध कराने के लिए ‘बिनौला घी’ बनाने का सिस्टम लगाया गया है।
बैल कोल्हू
बैल शक्ति के उपयोग का संदेश देते हुए गोशाला परिसर में बैल से चलने वाला कोल्हू लगाया गया है।
गौ सेवक
गोशाला में गोवंश की देखरेख, साफ़-सफ़ाई, चारा-भूसा इत्यादि देने के लिए लगभग 150 गौ सेवक हैं।
गोशाला परिसर में ही इन गौ सेवकों के निवास और भोजन की व्यवस्था की गई है। साथ ही गौ सेवकों के बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए गोशाला में ही गुरुकुल की स्थापना भी की गई है।
वास्तु
वास्तु विशेषज्ञ के निर्देशानुसार पूरी गोशाला का सर्वे किया गया है और उसी के अनुसार प्लान तैयार किया गया है।
शीघ्र ही वास्तु के अनुसार पूरी गोशाला को वर्गीकृत किया जाएगा।
राल गोशाला का औपचारिक प्रबंधन
उमा कल्याण ट्रस्ट ने औपचारिक रूप से राल गोशाला में सितंबर 2024 से गोवंश की सुरक्षा और पालन-पोषण के लिए अनेक प्रयास किये हैं।
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01. गोशाला का संचालन सुव्यवस्थित और सुचारु रूप से हो सके, इसके लिए गौ धाम की टीम ने लगातार चौबीसों घंटे अपनी सेवाएं दीं।
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02. कमज़ोर, बीमार और वृद्ध गोवंश के उपचार और स्वास्थ्य की देखभाल के लिए पशु चिकित्सक और एलएसए की नियुक्तियां।
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03. गोवंश के उपचार के लिए दवाओं की ख़रीददारी।
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04. सूखा-हरा चारा और पौष्टिक आहार की व्यवस्था।
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05. टीएमआर, ट्रैक्टर, हूपर आदि की ख़रीददारी।
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06. गोशाला में रहने वाले परिवार के बच्चों की शिक्षा-संस्कार के लिए गुरुकुल का संचालन।
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07. समय-समय पर गोवंश के हित में और गोशाला प्रबंधन से संबंधित अन्य कार्य किये गये।
स्वस्थ और खुशहाल गोवंश की दिशा में प्रयास
आने वाले महीनों में इन सभी प्रयासों का सुंदर परिणाम अवश्य सामने आएगा और स्वस्थ-खुशहाल गोवंश पूरी गोशाला में दिखाई देगा।
श्री विभोर प्रकाशम
प्रबंधक, राल गोशाला
(उमा कल्याण ट्रस्ट)